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तो कहो ना बेझिझक उन पाँवों से मुड़ जायें जरा

mayank vajpeyee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मूँद कर आँखे सोचो जरा
        
                                                    
                            
ना मानें तो भी उनको भींचो जरा
क्या दिखे जब खोलो आँखें
मन से अपने पूछो जरा
जो चाहा क्या सच में रंग ज़िंदगी ने वही भरा
कुछ अनचाही सी लगे जो खुली आँखों की हक़ीक़त
तो कहो ना बेझिझक उन पाँवों से मुड़ जायें जरा
एक महीने पहले
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