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ये उन खुली आँखों के बस का नहीं

mayank vajpeyee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            माँ के घर हूँ सपना सही पर आज मुझे जगना नहीं
        
                                                    
                            
आँखें भींच ली इस क़दर मैंने
अब इस घर से मुझे जाना नहीं
दिखा दें दुनिया खुशनुमा इतनी
ये उन खुली आँखों के बस का नहीं
6 दिन पहले
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Sanjai kumar

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