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कुछ हम कहने को तरसते रहे कुछ इज़हार से तुम बाज़ आते रहे

mayank vajpeyee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खाली काग़ज़ दवात और कलम हमको यूँ ही ताकते रहे
        
                                                    
                            
हाथ हालात और जज़्बात मिलकर बस लफ़्ज़ यूँ ही उलझाते रहे
कुछ हम कहने को तरसते रहे कुछ इज़हार से तुम बाज़ आते रहे
3 घंटे पहले
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