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चलो लड़ते झगड़ते इस शहर के हाथ थोड़ा बचपन रच दो

mayank vajpeyee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पकड़ो जरा नीला आकाश कोई और रंग भर दो
        
                                                    
                            
जो भागा देख तुम्हें इंद्रधनुष उसकी कमान का दो
बड़ा गुस्सा दिख रही ज़िन्दगी आज उसके मुँह पर ज़ोर से हंस दो
चलो लड़ते झगड़ते इस शहर के हाथ थोड़ा बचपन रच दो
2 घंटे पहले
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Prasoon Saxena

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