पकड़ो जरा नीला आकाश कोई और रंग भर दो
जो भागा देख तुम्हें इंद्रधनुष उसकी कमान का दो
बड़ा गुस्सा दिख रही ज़िन्दगी आज उसके मुँह पर ज़ोर से हंस दो
चलो लड़ते झगड़ते इस शहर के हाथ थोड़ा बचपन रच दो
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