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रूस-यूक्रेन युद्ध

Mansi Mittal

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                            तांडव मचा है युद्ध का,
        
                                                    
                            
हो रही हाहाकार।
उन माओं के कानों में,
गूँज रही चीत्कार।

आवोहवा है जहरीली,
बद से बदतर हो रही।
मौत के इस तांडव से,
लहू लुहान है हो रही।

उन मासूमों की सिसकी से,
सैलाब की नदियाँ बह रहीं।
कब तक ये खून खच्चर होगा??
मानवता ये कह रही।

शंखनाद जब बजता है
सुनकर रूह है कांप रही।
माँ, बहन, बीबी ,बच्चे सब
राह तुम्हरी ताक रहीं।

रूस यूक्रेन की ये ज्वाला,
हरदिन हरपल धधक रही।
अभिमानी सत्ता के आगे,
एक दूजे को डस रही ।

अब भी वक्त है....
युद्ध रोककर भूल सुधारो,
विनाश यहीं रुक जाएगा।
वरना....
अधिनायक की तोपों से,
अपाहिज, अपंग हो जाएगा।

मानसी मित्तल
शिकारपुर
जिला बुलंदशहर

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