अल्फ़ाज़ हो तुम
हो जीवन का आधार तुम ,
श्वास हो , शृंगार तुम ॥
नींद हूं मैं , हो ख्वाब तुम ,
सागर हो तुम , मैं तेरा किनारा ॥
प्रियवर भी हो , प्रियतम भी तुम ,
धड़कन में बसती कोई धुन हो तुम॥
लफ़्ज़ नहीं जो कह सकूं ,
बस वो एहसास हो तुम ॥
लिख सकूं न कभी जो ,
वो अल्फ़ाज़ हो तुम ॥
तेरी यादों में बीते हर लम्हा मेरा ,
तेरी हर बात छू जाए दिल को ॥
मैं अधूरी , मुकम्मल हो तुम ,
मेरे हर सांस की बस आस हो तुम ॥
अंधेरे में चांद की रोशनी जैसे हो तुम ,
मेरी हर खुशी का पैगाम हो तुम ॥