विज्ञापन

अल्फ़ाज हो तुम

Manshi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अल्फ़ाज़ हो तुम
        
                                                    
                            

हो जीवन का आधार तुम ,
श्वास हो , शृंगार तुम ॥
नींद हूं मैं , हो ख्वाब तुम ,
सागर हो तुम , मैं तेरा किनारा ॥

प्रियवर भी हो , प्रियतम भी तुम ,
धड़कन में बसती कोई धुन हो तुम॥
लफ़्ज़ नहीं जो कह सकूं ,
बस वो एहसास हो तुम ॥

लिख सकूं न कभी जो ,
वो अल्फ़ाज़ हो तुम ॥
तेरी यादों में बीते हर लम्हा मेरा ,
तेरी हर बात छू जाए दिल को ॥

मैं अधूरी , मुकम्मल हो तुम ,
मेरे हर सांस की बस आस हो तुम ॥
अंधेरे में चांद की रोशनी जैसे हो तुम ,
मेरी हर खुशी का पैगाम हो तुम ॥

 
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all