उर से उर मिले
खिले मन के फूल
विरह से मिलन मिले
बरस गए नैनों से नीर
भावों से भाव जब मिले
दुख सारे हुए अवमुक्त
प्रेम ,प्यार , स्नेह , नेह
मिल कर दे गए , जीवन को
संदेश सुंदर
जुड़े जब भी उर से उर
उर ने समझा ,परखा
उर ने स्वीकारा समग्र
उर जाने उर के भाव
उर में है, समस्त- समग्र
जग होगा , निराश उदास
जब सो जायेगा उर
जब सो जाएगा उर।।
-मनोज सिन्हा।