विज्ञापन

तुम्हारे लिए

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम्हारे सुसुप्त सारे भावों को
        
                                                    
                            
जगाने आया हूं! प्रिय
नव -वसंत में उगे नव- किसलय पातों को
उपवन में खिले सुंदर फूलों को
उपहार समझ तुम्हारे लिए लाया हूं ! प्रिय।।

न करना अस्वीकार ! प्रिय
तुम्हें ही रिझाने लाया हूं
गीतों के दो मीठे बोल रचकर
तुम्हें ही सुनाने आया हूं।।

मिलन के आशा में ढलकर
प्रेम -बंध में बांधने आया हूं
तुम असूत्र ही बंध जाना! प्रिय
मनोकामना यही रख कर आया हूं
समग्र उपहार भावों से
तुम्हारे लिए ही लाया हूं।।
-मनोज सिन्हा
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile