विज्ञापन

स्मृति रेखाएं

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्राणों की सरल रेखाओं में
        
                                                    
                            
समाया जग की विरह वेदना
आकुल नयन मूक रह कर
करती स्वयं की निर्भय विवेचना
घन- सघन सा दुख का क्षितिज
जिसका दिखता आदि न अंत
कैसे रहूं , प्रिय तुम बिन ,छाया है
जीवन के चारों ओर अंधेरा घनघोर
आ जाती जो तुम मेरे जीवन के पथ
खिलता हृदय के सरोवर में कुसुम अनेक
निहार- निहार उसे मैं पा जाता लक्ष्य जीवन का सुमधुर
आना अवश्य मेरे उर के स्मित पथ में
मिल मुझसे कह जाना जितना जी चाहे

धैर्य से मैं सब सुन लूंगा तुम्हारे मन का मर्म
परंतु एक बार तो तुम्हें आना ही होगा
अभिव्यक्त होने मेरे स्मित के पथ
अभिव्यक्त होने मेरे स्मित के पथ।।

-मनोज सिन्हा
एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all