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शैल की कहानी

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हां! शैल हूं
        
                                                    
                            
सदियों से
शुष्क ,सपाट ,निर्जन
कोई अहिल्या आई नहीं
पड़ा हूं ,एक ही करवट।।

हां !शैल हूं
सदियों से
वन नहीं
घास नहीं
फूल -कांटे
कुछ भी नहीं
कोई ,चिड़िया,तितली , मधूप
आया नहीं
मैं पड़ा हूं, एक ही करवट।।

हां! शैल हूं
सदियों से
खा रहा धूप -सघन
प्यासा, थका, हारा
हताश लेटा हूं, एक ही करवट
कोई झरना मेरी देह हो बहा नहीं।।

हां! शैल हूं
सदियों से
जोह रहा बाट
आती अहिल्या
मेरे पास
स्पर्श करती मुझे
हो जाता मेरा भी उद्धार
हो जाता मेरा भी उद्धार।।
हां! शैल हूं

- मनोज सिन्हा 
एक वर्ष पहले
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