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शब्द महिमा

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शब्द- शब्द
        
                                                    
                            
युग्मित हो
छंद -पद में
होते साकार
शब्द संगम से
काव्य कविता
लेती आकार
काव्य कविता में
होती है, जीवन की स्वीकृति
हर्ष ,उल्लास और अवसाद
उभरते जीवन में तरंग बन कर
समागम होता , जब उनमें
भर जाता कुसुम सा
जीवन में इंद्रधनुषी प्रभास।।

शब्द- शब्द
संयोजित हो
छंद- पद में
होते साकार।।

रंग होते हैं
जीवन की आशा
बिना रंग क्या होगी?
जीवन की परिभाषा
सुना होगा
यदि मौन होगा
जीवन का प्रवाह
स्पंदन में बसता है
मन का सुवास
दिवस- दिवस
आता जीवन में प्रभात
सूर्य- रश्मियों की सुनहरी
किरणों में खिलता जाता
जीवन का आस।।

शब्द- शब्द
संयोजित हो
छंद- पद में
होते साकार
शब्दों के संगम से
काव्य कृतियां
लेती आकार
काव्य में समाहित होता
जीवन का प्रवाह
जीवन का प्रवाह।।
- मनोज सिन्हा
 
एक वर्ष पहले
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