विज्ञापन

निर्विकार भाव

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            निर्विकार भाव
        
                                                    
                            
-------------------
चिर -संचित -विराग
मेरे विलोचन में बसते कहां?
चिर -प्रेम- सानिध्य
मेरे अंतर्मन में बसता
करुणा -विषाद रहते मुझसे कोसों दुर
अरुण की अरुणिमायुक्त
विचार मुझमें है, बसता।।

रंगीले घन आते -जाते
विचलित मैं नहीं होता
मौलिकता में रहता सदा
झंझावातों से मैं नहीं घबराता
भोर पहर आता, मैं
जीवन - पथ पर
सांझ नित्य लौट जाता, में
अस्ताचल के सदन
युग युग से चल रह यही कहानी

विधि -विधान प्रकृति का सदृष्य चल रहा
करुणा विषाद का पथ मेरे जीवन में आया कब?
मेरे जीवन में आया वह कब?

- मनोज सिन्हा
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Nema Ram

141 कविताएं

View Profile