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मन के धागे

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भावनाओं में बस कर
        
                                                    
                            
तेरे साथ चलता हूं
सुख-दुःख की परिधि में
दो बैलों हीरा और मोती
बन रहता हूं, आत्मकथ्य भी
एक दूजे का साथ लिखता हूं
ऐसा कहें! दिखता हूं, बाहर से
अलग अलग, लेकिन
मन के धागों से
मजबूती से, स्वेच्छा से आबद्ध हूं।
3 वर्ष पहले
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