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महाकाव्य

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            राम नाम ही है
        
                                                    
                            
महाकाव्य इस जीवन का
चित्रण रामायण में वर्णित है
पा लो शरण सुमिरन प्रभु का
करनी ही तो इस जीवन की
शेष रह जानी है
क्षणभंगुर है यह जीवन चक्र
न जाने कब इसे थम जानी है
पा लो आराधना सानिध्य प्रभु का
शेष तो यहीं रह जानी है
कर्म पथ पर अंकित कर सुकर्मों को
प्रभु के घर फिर लौट कर चले जाना है
कर लो अराधना सुमिरन प्रभु का
शेष सब कुछ यही रह जानी है।।
-मनोज सिन्हा
एक वर्ष पहले
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