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क्षणभंगुरता

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस क्षणभंगुर से जीवन में
        
                                                    
                            
रंग कौन सा भरूं मैं?
तुम्हीं बताओ
सोने से तन मन में
लाऊं कौन सा भाव?
सभी रंगे है
अपने मौलिक रंगों में।।

अपरिचित अनजाना
कोई भी नहीं
आबद्ध हैं, सारे
जीवन के आयाम
मूल भाव लिए
जीवन के प्रसंगों में
जीवन के प्रसंगों में।।

विरह व्यथा
अवसाद विषाद
आते जाते मेघों से
बह जाते नैनों से
बरस बरस
जीवन के पथ
जीवन के पथ ।।

जिसने भी खोई मौलिकता
हो गए धूसर से
इस जीवन के क्रम में
इस जीवन के क्रम में।।

इस क्षणभंगुर से जीवन में
रंग .................!
-मनोज सिन्हा
 
एक वर्ष पहले
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