विज्ञापन

क्षण भंगुरता

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्षणभंगुर से
        
                                                    
                            
इस जीवन में
क्या हो परमतत्व
मुक्तिमार्ग का पथ
इच्छा-मोह से
आच्छादित मन-कर्म
देता है, वियोग सदा
लेकिन सुकर्मो का योगफल
जीवन को देता है, सुखद-संयोग
मन चाहता है, खिलना
उपवन के आंगन
दिल चाहता है, उड़ना
मन के आंगन
मन चाहता है, पाना
प्रकाश का समग्र-पथ।।

उसी पथ पर चल
श्रीराम से मिले थे
भक्त केवट अभिराम
वर्तमान संदर्भ यदि पा सके
केवट के समदृष्य सा भाव
तो कोई भी मिल सकता है
परमतत्व से
हे हरि!
श्रीराम से ।।
3 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7431 कविताएं

View Profile

Anil Pandey

484 कविताएं

View Profile