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जीवन दर्शन

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिसने भी जीवन का परिपेक्ष्य
        
                                                    
                            
उपेक्षित किया हो, जीवन भर
वे कर रहे हैं, अब नैतिकता की बातें
नीतियां और नीति रहीं जिनकी स्व मात्र के लिए
अब दे रहे मानवीयता सामाजिकता का ज्ञान
समरसता क्या होती है
मानवता के लिए भान नहीं जिन्हें
वे सिखा रहे आज नीति
आत्मश्लाघा से पीड़ित प्राण
क्यों बेचैन होकर हो रहे
आज निष्प्राण
यही बात करते आरम्भ से
तो होती नहीं कभी जीवन में यह अधोगति
यह अमृत सा जीवन सिर्फ
नाम नहीं है केवल स्वार्थ का
दधीचि ने दान कर अस्थियां
सिखलाया जग को क्या होता है परमार्थ
उत्सर्ग में जो बात निहित है
स्वार्थ में कहां वह विहित है
आओ लें संकल्प न होने देंगे
जीवन के मूल्यों का अवमूल्यन
जीवन तो है एक दर्शन
जीवन तो है एक दर्शन।।
-मनोज सिन्हा
 
एक वर्ष पहले
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