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चुप्पी मेरी

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं समझता हूं, सब-कुछ
        
                                                    
                            
परंतु! कहता कुछ भी नहीं
समस्या तुम्हारी यह हैं
तुम छिपा रहे हो, अधिक।।

चाहते हो इलाज सही हो
तो मन में रखों कुछ नहीं
यदि नही भी बताओगे
तो तुम्हें पढ़कर समझ लूंगा
मैं कारोबार समझने
समझाने का करता हूं।

झूठ बोलकर
संवेदनाओं को बटोरों नहीं
मैं बहता नही हूं
औरों की तरह
समझता हूं सब_ कुछ
पर कहता कुछ भी नहीं।।
3 वर्ष पहले
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