आसमान है नीला क्यों
बादल है, काला क्यों
सात तारें पंक्तिबद्ध है, क्यों
ध्रुव-तारा अटल है क्यों?
नियम तुमने बनाए
मकान भी, और संविधान भी
प्रकृति ने भी नियम बनाए
फिर यह प्रश्न है क्यों?
नभ बुलाता खगों को
उसे बैठाता वक्ष पर
विचरण कर अनंत-नील-पथ
खग लौट आते घर को।
अंबर देता प्रेरणा
नौ ग्रहों पर जाने को
उत्साह से बढ़कर मानव
जा पहुंचा चंद्रमा पर
लाल ग्रह भी दूर नहीं
आएगी सबकी बारी
समय के साथ बारी-बारी
जब विजेता होगा
नीला ग्रह
नौ ग्रहों पर
राहु-केतु-शनि
सब होंगें विजित-अधीन
फिर होगा संपूर्ण गगन
तुम्हारा! तुम भी विचरना
नभ के नील-पथ पर अनंत।।