विज्ञापन

अहसास

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब भी मिले
        
                                                    
                            
फूल दिल में खिले
जब भी बोले
शहद अमृत से झरे
तुम कोई और नहीं
मोगरे के बाग से
होकर आती हुई
महकती हवा हो
बहती रहो सदा
मोगरे, गुलाबों, जुही से होकर
आती रहो उन
सांसों की सौगात लेकर
शब्द नहीं है
तुझे कह सकूं धन्यवाद
सलामत रहो सदा
सलामत रहो।
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12437 कविताएं

View Profile