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आग्रह

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ कहो ना
        
                                                    
                            
सुनते भी नहीं
कुछ कहते भी नहीं
अक्सरहां
मौन ओढ़ लेते हो
तुम्हारी प्रतीक्षा में
कब से हूं, मैं अधीर
आलोकित क्यों नहीं होते?
प्रदिप्त किरण सा
हर दिन आती है, उषा
देने प्रकाश का सौगात
अब मान भी जाओ तुम
उतर कर आ जाओ
मेरे मन के आंगन में
मिटा जाओ द्वंदों के विकार
अब आ भी जाओ
अब आ भी जाओ!
3 वर्ष पहले
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Dn Chaubey

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