विज्ञापन

उम्र भर ढूंढता फिरा मैं वफा की खुशबू

Manoj Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरे ख़यालों में डूबा तो किनारा न मिला,
        
                                                    
                            
दिल को तेरे सिवा कोई सहारा न मिला।।

उम्र भर ढूँढ़ता फिरा मैं वफ़ा की ख़ुशबू,
तेरी चाहत-सा कहीं और नज़ारा न मिला।।

रात ख़ामोश थी, सितारे भी सोए थे मगर,
चाँद से बढ़कर तेरा ही उजाला न मिला।।

तेरी यादों ने मेरी रूह को ऐसा छुआ ,
दर्द था, फिर भी कोई ग़म गवारा न मिला।।

लोग कहते रहे कि भूल जा उसको मगर,
दिल को इस फ़ैसले का इशारा न मिला।।

मैंने अश्कों से लिखी इश्क़ की पूरी तहरीर,
फिर भी किस्मत को मेरा ये इशारा न मिला ।।

अब तो हर साँस तेरे नाम की तस्बीह हुई,
इस इबादत - सा जहाँ में नज़ारा न मिला।।

एमके सिंह आज भी महफ़िल में ग़ज़ल पढ़ता है
मगर,तेरे ख़यालों से हसीं कोई नज़ारा न मिला।।
- एम के सिंह
भागलपुर (बिहार)
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all