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उम्र भर ढूंढता फिरा मैं वफा की खुशबू

                
                                                         
                            तेरे ख़यालों में डूबा तो किनारा न मिला,
                                                                 
                            
दिल को तेरे सिवा कोई सहारा न मिला।।

उम्र भर ढूँढ़ता फिरा मैं वफ़ा की ख़ुशबू,
तेरी चाहत-सा कहीं और नज़ारा न मिला।।

रात ख़ामोश थी, सितारे भी सोए थे मगर,
चाँद से बढ़कर तेरा ही उजाला न मिला।।

तेरी यादों ने मेरी रूह को ऐसा छुआ ,
दर्द था, फिर भी कोई ग़म गवारा न मिला।।

लोग कहते रहे कि भूल जा उसको मगर,
दिल को इस फ़ैसले का इशारा न मिला।।

मैंने अश्कों से लिखी इश्क़ की पूरी तहरीर,
फिर भी किस्मत को मेरा ये इशारा न मिला ।।

अब तो हर साँस तेरे नाम की तस्बीह हुई,
इस इबादत - सा जहाँ में नज़ारा न मिला।।

एमके सिंह आज भी महफ़िल में ग़ज़ल पढ़ता है
मगर,तेरे ख़यालों से हसीं कोई नज़ारा न मिला।।
- एम के सिंह
भागलपुर (बिहार)
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2 महीने पहले

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