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पत्नि हो ऐसी

Manoj Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पत्नी हो ऐसी जो नहीं माने कभी पति की बात,
        
                                                    
                            
घर के काम छोड़ करे मोबाइल से मुलाकात।।

सुबह हुई तो रील बनी, हुई शाम फिर चैट,
पति बोले चाय पिलाओ बोली रुको करो ज़रा वेट।।

पति से करती सदा बहस बड़ी, बात–बात पर रार,
मायके वालों की चर्चा में हँसकर दिखता खूब प्यार।।

पति से बोले —“खाना बनाओ,थोड़ा हाथ बँटाओ”,
खुद बैठकर मोबाइल लेकर दुनिया भर समझाओ।।

पति की झूठी गलती निकाल,करती बड़ी व्याख्यान,
अपनों की हर गलती भूल, मगर बन vजाए सम्मान।।

पत्नी बोली, “सीखो जी अब नया ज़माना है आया,
पति बोला—“हँसते–हँसते जीवन हमने नया पाया।।

रूठना–मनाना तो चलता है, हर रिश्ते की है सौगात,
हँसी–मज़ाक से ही खिलते घर आँगन के हालात।।
- एम के सिंह
3 महीने पहले
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