आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

पत्नि हो ऐसी

                
                                                         
                            पत्नी हो ऐसी जो नहीं माने कभी पति की बात,
                                                                 
                            
घर के काम छोड़ करे मोबाइल से मुलाकात।।

सुबह हुई तो रील बनी, हुई शाम फिर चैट,
पति बोले चाय पिलाओ बोली रुको करो ज़रा वेट।।

पति से करती सदा बहस बड़ी, बात–बात पर रार,
मायके वालों की चर्चा में हँसकर दिखता खूब प्यार।।

पति से बोले —“खाना बनाओ,थोड़ा हाथ बँटाओ”,
खुद बैठकर मोबाइल लेकर दुनिया भर समझाओ।।

पति की झूठी गलती निकाल,करती बड़ी व्याख्यान,
अपनों की हर गलती भूल, मगर बन vजाए सम्मान।।

पत्नी बोली, “सीखो जी अब नया ज़माना है आया,
पति बोला—“हँसते–हँसते जीवन हमने नया पाया।।

रूठना–मनाना तो चलता है, हर रिश्ते की है सौगात,
हँसी–मज़ाक से ही खिलते घर आँगन के हालात।।
- एम के सिंह
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर