विज्ञापन

ममता की मुरत है माँ

Manoj Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ममता की मूरत है माँ,प्रेम की ये पहचान है,
        
                                                    
                            
उसके चरणों में ही जैसे हर खुशी का धाम है।।

ख़ुद के हिस्से की सभी खुशियाँ हमें देती रही,
दर्द की हर रात में भी ये मुस्कुराती शाम है।।

भूख अपनी भूलकर रोटी हमें खिलती रही,
त्याग की वह दास्ताँ दुनिया में सबसे आम है।।

धूप अपने सिर पे लेकर छाँव हम पर कर गई,
माँ की ममता से बड़ा न संसार में कोई तीर्थधाम है।।

जब भी गिरा मैं राह में ,उसने ही सँभाला प्यार से,
उसकी दुआओँ से ही रोशन मेरा हर काम है।।

माँ , नींद अपनी बेचकर सपने हमारे बुन दिए,
उसकी आँखों में सजा बस बेटों का ही नाम है।।

घर में माँ की हँसी हो तो, घर भी मंदिर बन उठे,
उसके बिन हर एक आँगन सिर्फ़ सूना धाम है।।

वक़्त बदले, लोग बदलें , जब बदल जाए यह जहाँ,
माँ का निष्कलुष स्नेह हर मौसम में अविराम है।।

जो भी पाया ज़िंदगी में, माँ की दुआओँ से मिला,
उसकी रहमत से ही हर मुश्किल भी हुई आसान है।।

सिर झुकाकर "एम के सिंह " इतना ही कहना चाहता,
माँ का आँचल इस धरा पर ईश का वरदान है ।।
- एम के सिंह
 
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7414 कविताएं

View Profile