हुस्न का रंग भी इक रोज़ उतर जाता है ,
दिल का रिश्ता हो तो मौसम भी ठहर जाता है।।
चाँद चेहरे की चमक कब तक उजाला देगी,
प्यार सच्चा हो तो हर ज़ख्म सँवरम जाता है।।
आईनों से न कभी भी ख़ुद की कहानी पूछो,
अक्सर वक़्त के साथ यहाँ चेहरा बदल जाता है।।
हुस्न गर साथ हो तहज़ीब और सादगी की,
हर कोई देख के फिर दिल में उतर जाता है।।
नाज़ करना तो करो अपनी अदा पर लेकिन,
अहं का फूल बहुत जल्द ही बिखर जाता है।।
जिसके लहज़े में हो सदा अपनापन और सच्चाई,
उसका चेहरा भी बिना श्रृंगार के निखर जाता है।।
हुस्न केवल नहीं आँखों की चमक का नाम,
दिल अगर साफ़ हो, तो इंसान सँवर जाता है।।
- एम के सिंह