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ज़ख्मों पर मरहम

Manoj Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दर्द भरे हैं दिल में फिर भी, इसे
        
                                                    
                            
चेहरे पर कभी उतार नहीं सकता।।

देख कर चेहरे की रंगत को कोई ,
दिल के दर्द को मिटा नहीं सकता।।

अपने दर्द को साझा करना गैरों
से, ये खुद के ही जलालात होंगे।।

नहीं हैं आज कोई भी अपना, जो
अपनों के ज़ख्मों पर मरहम लगा दे।।

-एम के सिंह
 
3 वर्ष पहले
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