दो जिस्म एक जान हैं हम,ये प्यार की पहचान है,
तेरा मेरा साथ ही अब मेरी सच्ची पहचान है।।
तेरी नज़र से ही देखता हूँ हर रंग इस दुनिया का,
तेरी ख़ुशी में ही छिपी मेरी हर मुस्कान है ।।
तू धूप बनके साथ रहे, मैं छाँव बनकर चल दूँ,
यूँ ही कटे हर उम्र, यही दिल का अरमान है।।
तेरी वफ़ाओं की ख़ुशबू से महका है मेरा जीवन,
तेरे बिना तो हर ख़ुशी भी जैसे वीरान है।।
दर्द अगर तेरी आँखों में, आँसू मेरी पलकों पर,
इतना गहरा अपना रिश्ता, रूहों का अनुबंध है।।
सदियाँ भी कम पड़ जाएँगी इस प्रेम की गहराई में ,
हर जन्म तेरा साथ मिले, बस इतनी-सी फ़रियाद है।।
ना चाँद, ना तारे माँगूँ, ना कोई और ख़ज़ाना ,
तेरा हाथ मेरे हाथ रहे, बस इतना-सा वरदान है।।
कवि एम के सिंह' लिखते हैं, प्रेम इबादत होता है,
दो जिस्म एक जान हैं हम, यही हमारा अभिमान है।।
- एम के सिंह