अपनी किरणें बिखेरने का,
सूरज को जब से जुनून है,
चरागों को भी हैसियत का
अपना सुकून है, सुकून है।
रौशनी से होवे सराबोर
धरती का अंतिम हर कोर
ऐसे ही बलिदान भाव का
दौड़ता धमनियों में खून है।
सेवा को जिन्होंने तप माना
"देश प्रथम" को ही यज्ञ जाना
आज नरों में ईंद्र से हैं वो
धर्म, संस्कृति, कानून हैं।
विश्व- क्षितिज पर जिन्होंने
भारत का मान बढ़ाया है
दूरदर्शिता की विशालता से
भांपते, रचते मजमून हैं।
वर्तमान की राजनीति में
जिनका लोहा मानते सब हैं
कोहिनूरी हीरे के जैसा
सदा रहेगी, और आज धूम है।।