विज्ञापन

आजा जी ले जी भर के

Manoj Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आजा जी ले जी भर के
        
                                                    
                            
रूठ न तू मुझसे
ये वक्त भी अपना है नहीं
न आएगी ऐसी कोई ख्वाहिशें
फिर मिले या ना मिले
क्या पता हो ना, फिर मोहब्बतें
आजा जी ले जी भर के ..

सुनहरी धूप किनारा
सुबह में रोशन
ये धरती गगन,
सुंदर सा नज़ारा
कितना प्यारा
दूर नहीं हूँ मैं तुझसे
आजा जी ले जी भर के ..

"कच्ची पक्की जो भी है
यार यारी अपनी अच्छी है
सब झूठ मूठ बातें है जग में,
पर अपनी तो सच्ची है "

- मनोज कुमार यकता
12 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

387 कविताएं

View Profile

SHASHANK SRIVASTAVA

7 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7088 कविताएं

View Profile