मुसीबत में फसी, हाथ हिलाती हर औरत बहना थी,
देवदूत बनकर पहुंची, वह भारतीय सेना थी l
कोई मुसीबत देश पर आये, हर विपदा वह मेरी थी,
यह हर दम कहने वाली, केवल भारतीय सेना थी l
सब को संभाला और बचाया, हर दम चौकस रहती थी,
पत्थर मार को भी गले लगाती, वह भारतीय सेना थी l
बाड़ भूकम्प चाहे जंग हो, सीना ताने रहती थी,
अपना सर्वस्व त्यागने वाली, केवल भारतीय सेना थी l
ऊँच - नीच व भेद-भाव को, नहीं कभी वह रखती थी,
रोग द्वेष को भी सहने वाली, केवल भारतीय सेना थी l
हर राष्ट्र पीड़ा को, स्व पीड़ा वह कहती थी,
निःस्वार्थ सेवा के लिए खड़ी, केवल भारतीय सेना थी l
- मनोहर सिंह जामलिया