इन कटीली राहों में मुझे नंगे पांव चलना है
डर लगता है पर डरपोक नहीं हूं
विश्वास है इसे भी पर कर लूंगा
इससे भी बड़ी पराव आएगी
उसे भी तो मुझे पर करना है
यही तो जिंदगी है
कभी दुख तो कभी सुख।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।