मनुष्य का एक स्वभाव होता है
सोच विचार कर करना और वो ऐसा करता है
परंतु हर कोई अपने निर्णय का परिणाम पाने में समर्थ नहीं हो पता है
क्यों कुछ लोग ही समर्थ हो पाते हैं
क्या अपने कभी सोचा है
कुछ लोग ही इस संसार को बदल पाते हैं
ऐसा क्या है जो इन कुछ लोग में ही पाए जाता है
सबों में नहीं
ऐसा इसीलिए ऐसे लोग अपने सोच और अपने सामर्थ से
दुनिया को दुनिया की सोच बदल देते हैं
इसीलिए ये सफल होते हैं
और असफल वो होते है जो संसार की डर से
अपने सोच अपने अपने निर्णय को बदल लेते हैं
इसीलिए ये सफल ना हो कर असफल होते हैं
यही अंतर है सफल और असफल लोगों में
इसीलिए सफल होना है तो
लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग बदले लक्ष्य नहीं
तभी आप उन कुछ लोगों में शामिल हो सकते हैं
जो दुनिया को बदलने की ताकत रखते हैं।।
- मनमोहन सिंह
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