बाहर खुशी है पर अंदर नहीं
लोग खुश है पर मैं नहीं
पता नहीं मेरे ही साथ ऐसा क्यों होता है
खुश होना चाहूं भी तो उदासी आ जाती है
कुछ तो है जो अंदर ही अंदर खाए जाती है
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