विज्ञापन

अकेला साथी

Manmohan Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपनों की महफिल में मैं अकेला साथी ढूंढता रह गया
        
                                                    
                            
साथी थे कई सब दूर हो गए
और मैं वहीं का वहीं रह गया
अब पता नहीं दुबारा मिलेंगे या नहीं
तुम याद तो बहुत आओगे पर मैं याद करूंगा नहीं
पता है क्यों मुझे और गम नहीं चाहिए इतना ही काफी है
तुम्हें याद न करने के लिए।।


हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

RATAN KUMAR

613 कविताएं

View Profile

Rajiv Tyagi

423 कविताएं

View Profile

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile