बाहर खुशी है पर अंदर नहीं
लोग खुश है पर मैं नहीं
पता नहीं मेरे ही साथ ऐसा क्यों होता है
खुश होना चाहूं भी तो उदासी आ जाती है
कुछ तो है जो अंदर ही अंदर खाए जाती है।।
मनमोहन सिंह
दरभंगा