रोना तो सबको आता है
चाहे वो गम में रोए या खुशी में
पर रोते जरूर है
जनाब हैं हम इंसान है ना
ये इमोशन बड़ा ही पेचीदा होता है
कब हसाता है और कब रुलाता है
पता ही नहीं चलता है
पर रोते सब है
कोई आंसू दिखाता है
तो कोई बिना आंसू के ही
अब ये बिना आंसू के रोते कैसे है
शायद आप जानते होंगे
मेरे हिसाब से हर कोई जानता है
जब रोना आता है पर रो नहीं पाते है
पर रोते जरूर है
अंदर ही अंदर।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।