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क्यों अंत समझकर

Manju Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खेल नहीं था
        
                                                    
                            
जिंदगी थी
फिर क्यों कभी
कद्र नहीं की

व्यवधान था
अवसान नहीं था
क्यों अंत समझकर
इंतिहा की थी।
-मं शर्मा 
3 घंटे पहले
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