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चाहे कितनी कठिन डगर हो।

Manju Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मंदिर सा पावन घर हो
        
                                                    
                            
खिड़की पैनी नज़र हो
स्वागत करता दर हो
हर अतिथि की कदर हो

चरित्रवान सहचर हो
जीने की चाह अगर हो
खेल खेल में कटे सफर
चाहे कितनी कठिन डगर हो।
-मं शर्मा 
एक घंटा पहले
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