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चाहे कितनी कठिन डगर हो।

                
                                                         
                            मंदिर सा पावन घर हो
                                                                 
                            
खिड़की पैनी नज़र हो
स्वागत करता दर हो
हर अतिथि की कदर हो

चरित्रवान सहचर हो
जीने की चाह अगर हो
खेल खेल में कटे सफर
चाहे कितनी कठिन डगर हो।
-मं शर्मा 
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53 मिनट पहले

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