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लफ्जों पर मेरे पहरा नहीं था

Manju Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लफ्जों पर मेरे पहरा नहीं था
        
                                                    
                            
ज़मीर तेरा भी बहरा नहीं था
मौसम की तरह बदला तू तो
रंग तेरा कभी गहरा नहीं था

हर दौर में रहे यही तेवर
बदला कभी चेहरा नहीं था
गर्दिशों से था पुराना नाता
तन्हाई में भी तन्हा नहीं था।
-मं शर्मा 
एक दिन पहले
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Aditya Mishra

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