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निदान किसी का सोचा ही नहीं

Manju Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नित नए नए शब्द गढ़ता गया
        
                                                    
                            
अर्थ किसी का समझा ही नहीं

अवसाद मन में गहरे उतर गया
निदान किसी का सोचा ही नहीं

तूफान कल रात फिर गुज़र गया
टूटे पत्तों को किसी ने सहेजा नहीं।
-मं शर्मा
2 घंटे पहले
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Sanjai kumar

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