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निदान किसी का सोचा ही नहीं

                
                                                         
                            नित नए नए शब्द गढ़ता गया
                                                                 
                            
अर्थ किसी का समझा ही नहीं

अवसाद मन में गहरे उतर गया
निदान किसी का सोचा ही नहीं

तूफान कल रात फिर गुज़र गया
टूटे पत्तों को किसी ने सहेजा नहीं।
-मं शर्मा
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1 hour ago

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