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बेचैनिया

Manju Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब से पड़ी नज़र शहर की
        
                                                    
                            
गाँव की रौनक छिन गई है
यूँ ही नहीं ये गलियाँ सूनी
अकेलेपन से बेचैनी जन्मी है।
-मं शर्मा 
6 घंटे पहले
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