गुलशन है तो क्या ग़म है
बहारों की आमद हो न हो
फलक पर रहने दो चाँद को
ज़मी को दूर से दीदार हो
जो भी मिला क्या कम है
बे-वजह मलाल भी क्यों हो ।
-मं शर्मा