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बे-वजह

Manju Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गुलशन है तो क्या ग़म है
        
                                                    
                            
बहारों की आमद हो न हो

फलक पर रहने दो चाँद को
ज़मी को दूर से दीदार हो

जो भी मिला क्या कम है
बे-वजह मलाल भी क्यों हो ।
-मं शर्मा 
एक महीने पहले
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