मनुष्य हो
आकांक्षा रखते हो
एक नहीं
अनेक रखते हो
सच में
मनुष्य लगते हो
जीवन का
ईंधन है आकांक्षा
क्या गलत
जो अनेक रखते हो
मनुष्य हो
मनुष्य दिखते हो ।
-मं शर्मा