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मां तेरी ममता

Manju Karnatak

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरी त्याग, तपस्या, ममता के आसमान तक हाथ नहीं पहुंच सकते।
        
                                                    
                            
मां तेरी ममता के गहरे सागर को हम शब्दों से बयां नहीं कर सकते।
जीवन सृजन करने को तूने नौ माह तक गर्भ के कष्ट सहे।
प्रसव-पीड़ा ,पालन -पोषण के तेरे त्याग को, पूरा समझ नहीं सकते।

जीवन के चिंता रूपी पतझड़ में बचपन की स्मृतियां याद हैं।
तेरे आंचल में छुप जाना, तेरे कंधे की मजबूती याद है
मां बनकर इस मां ने, समझा है, मां बनना कितना दुष्कर है।
संस्कारों का बरगद बनकर,अपनी संतति का पालन कितना मुश्किल है?

परिवार की मर्यादा में रहकर तूने जो संघर्ष किया, लिख नहीं सकते।
तेरे अनंत रूपों की कहानी, हम शब्दों में बयां नहीं कर सकते।
बड़े होते ही बच्चे उड़ जाते हैं, नीड़ याद नहीं रखते हैं।
अपने स्वार्थों में खोकर, तेरी ममता को भी भूल जाते हैं।

धरा सी सहनशीलता तुझमें, तूने हमको आश्रय दिया।
खुद कष्ट सहे कई पर हमको, शिक्षा से परिपूर्ण किया।
जीवन में जो भी सुख, समृद्धि, संतोष, हमने पाया है।
वह तेरी ही उदारता और परोपकार का सरमाया है।

- मंजु कर्नाटक
2 वर्ष पहले
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