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किसी की जय करने से पहले सौ बार सोचो

Manish Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            किसी की जय करने से पहले
        
                                                    
                            
सोचना ‘सौ’ बार
कहीं उसकी जय करने में
उसके हाथों की कठपुतली तो
न बनने जा रहे तुम
उसकी जय करने में
आत्मसम्मान यदि मर जाए
औकात याद दिला दी जाए
तुमको नीच बता दिया जाए
या शीश झुका दिया जाए
तो ‘जय’ मत करना!
आंखे नीची करवा दी जाएं
घुटने यदि टेकवा दिए जाएं
लाख दबाव से गर्दन झुक जाए
बोझ तले कंधे दुख जाए
तो फिर वहां तुम ‘जय’ मत करना
मर जाओ तुम में तुम
न रहो कल वो तुम
न पहचानो खुद को भी
मत करना ऐसा भी
जहां जरूरी न हो,
वहां ‘जय’ मत करना!
3 वर्ष पहले
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